“नाम मिल्क फीवर है… फिर कान ठंडे क्यों हैं?”
ब्याने के बाद किसान ने देखा कि गाय कुछ सुस्त लग रही थी। वह पहले जैसी सक्रिय नहीं थी। चारा भी कम खा रही थी। लेकिन एक चीज़ ने किसान का ध्यान खींचा |
गाय के कान ठंडे थे।
किसान ने तुरंत कहा - “अगर इसे मिल्क फीवर है, तो शरीर गर्म होना चाहिए… फिर कान इतने ठंडे क्यों हैं?”
यही इस केस का सबसे बड़ा सुराग था।
गुत्थी: नाम में फीवर, लेकिन शरीर ठंडा क्यों?
असल में मिल्क फीवर नाम थोड़ा भ्रामक है।
मिल्क फीवर में मुख्य समस्या बुखार नहीं, बल्कि रक्त में कैल्शियम का कम होना है।
जब ब्लड कैल्शियम कम होता है, तो इसका असर सिर्फ दूध और मसल्स पर ही नहीं, बल्कि शरीर के सामान्य फंक्शन्स पर भी पड़ सकता है।
गंभीर हाइपोकैल्सीमिया में:
- शरीर की गतिविधियां धीमी होने लगती हैं
- मांसपेशियां कमजोर हो सकते हैं
- रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है
- और शरीर के बाहरी हिस्सों तक रक्त प्रवाह कम हो सकता है
कान, पैर और शरीर के दूसरे बाहरी हिस्से शरीर के मध्य से दूर होते हैं। जब इन हिस्सों तक गर्म रक्त का सर्कुलेशन कम होता है, तो वे ठंडे महसूस हो सकते हैं। इसलिए मिल्क फीवर में कई बार:
कान ठंडे महसूस हो सकते हैं।
फिर इसे “मिल्क फीवर” क्यों कहते हैं?
नाम मिल्क फीवर होने के बावजूद इसमें सामान्य बुखार जैसी स्थिति जरूरी नहीं होती। यह नाम पुराने समय से चला आ रहा है। असल समस्या है:
रक्त में कैल्शियम की कमी
यानी हाइपोकैल्सीमिया
और जैसे-जैसे रक्त कैल्शियम लेवल कम होता है, गाय में कमजोरी और अन्य लक्षण बढ़ सकते हैं।
किसान क्या याद रखें?
अगर ब्याने के बाद गाय में ये बदलाव दिखाई दें
- कान ठंडे
- शरीर ठंडा महसूस होना
- सुस्ती
- चारा कम खाना
- चलने या खड़े होने में परेशानी
तो सिर्फ एक लक्षण देखकर निर्णय न लें।
पूरी गाय को देखें।
क्योंकि ठंडे कान एक सुराग हो सकते हैं, लेकिन जाँच के लिए अन्य लक्षण भी महत्वपूर्ण हैं।





