गाय: मिल्क फीवर के क्लिनिकल लक्षण वाली
मुख्य सुराग: मिल्क फीवर वाली गाय में जेर फंसने की समस्या (आरओपी), कीटोसिस, मास्टाइटिस के केसेस भी हो गए
आज की गुत्थी: “कैल्शियम की कमी से कई और अन्य बीमारियां क्यों हुई?”
इस केस से सीखें: कैल्शियम का मसल्स, नर्व्स, रूमेन, थन और गर्भाशय में रोल।
कैल्शियम करता क्या है?
“क्या कैल्शियम सिर्फ हड्डियों के लिए होता है?”
किसान ने पूछा -
“कैल्शियम तो हड्डियों को मजबूत करने के लिए और दूध उत्पादन के लिए होता है ना?”
बिल्कुल। लेकिन गाय के शरीर में कैल्शियम की कहानी इससे कहीं बड़ी है।
सुराग नंबर १ - मांसपेशियां
मांसपेशियों के संकुचन के लिए कैल्शियम जरूरी है।
इसलिए मिल्क फीवर में:
मांसपेशियों की ताकत कम हो जाती है
और गाय:
- लड़खड़ा सकती है
- कांप सकती है
- उठने में परेशानी दिखा सकती है
- अंततः बैठ सकती है
सुराग नंबर २ - नसें
कैल्शियम तंत्रिका तंत्र की क्रिया में महत्वपूर्ण है।
इसलिए कैल्शियम की कमी से तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियों के बीच प्रभावित हो सकती है। और दूध न उतरने की समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।
सुराग नंबर ३ - रूमेन
रूमेन की गतिविधि भी मांसपेशियों की कार्यक्षमता पर निर्भर है। इसलिए कैल्शियम की कमी में रूमेन की गतिविधियां कम हो सकती हैं। और किसान को इसका असर दिख सकता है:
खाना न पचना—जुगाली कम → दाना चारा न खाना- एनर्जी की कमी– कीटोसिस बीमारी
सुराग नंबर ੪ - गर्भाशय
गर्भाशय भी एक मांसपेशियों से बना एक अंग है।
भारी मिल्क फीवर में गर्भाशय का कॉन्ट्रैक्शन प्रभावित हो सकता है, और ऐसा होने से डिसटोसिया एवं आगे चल कर जेर फंसना (आरओपी) के केसेस देखने को मिल सकते हैं।
तो असली बात क्या है?
कैल्शियम केवल: “हड्डियों का मिनरल”
नहीं है। यह गाय के: मांसपेशियों + नसों + रूमेन + धन + गर्भाशय के सामान्य काम के लिए भी महत्वपूर्ण है।





