भैंस ने चारा छोड़ा और दूध भी कम हो गया
राजू की भैंस रानी रोज लगभग पूरा नांद साफ कर देती थी। लेकिन पिछले 3 दिनों से रानी चारे को मुंह तो लगाती, फिर छोड़ देती थी। राजू ने देखा कि दूध की मात्रा भी कम हो गई है।
उसने सोचा, “शायद चारा पसंद नहीं आ रहा।” उसने दूसरे चारे की व्यवस्था की, लेकिन रानी ने उसमें भी ज्यादा रुचि नहीं दिखाई।
अगले दिन राजू ने पशु चिकित्सक को बुलाया।
डॉक्टर ने पूछा, “भैंस कब से कम खा रही है। जुगाली कैसी है। गोबर सामान्य है पेट में कोई असामान्य बदलाव तो नहीं ” राजू ने बताया कि गोबर पहले की तुलना में कम और सूखा हो गया है और रानी पहले जितनी सक्रिय भी नहीं है।
डॉक्टर ने कहा, “जब भूख कम हो और साथ में जुगाली और गोबर की मात्रा भी बदल जाए, तो हमें रुमेन की गतिविधि और पाचन तंत्र पर ध्यान देना चाहिए।”
डॉक्टर ने भैंस की जांच की और राजू से उसकी फीडिंग के बारे में पूछा।
“क्या आपने हाल ही में दाना/ चारा बढ़ाया है?” राजू ने बताया कि दूध बढ़ाने के लिए उसने कुछ दिन पहले ही अचानक चारा बदल दिया था
डॉक्टर ने समझाया, “फीड में अचानक बदलाव रुमेन के सामान्य संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इसका असर भूख और जुगाली पर दिखाई दे सकता है।”
राजू “क्या सिर्फ दाना कम कर दूं ”
डॉक्टर बोले, “कभी भी अचानक से दाना चारा नहीं बदलना चाहिए, नया चारा धीरे धीरे सुरु करना चाहिए और फिर उसको बढ़ाना चाहिए. फीड की गुणवत्ता, मात्रा, पानी, जुगाली, गोबर और पशु की सामान्य स्थिति - सब महत्वपूर्ण हैं।”
उन्होंने फीड मैनेजमेंट में बदलाव धीरे-धीरे करने और पशु की निगरानी करने की सलाह दी।
राजू ने उस दिन एक बात सीखी - भैंस का चारा छोड़ना सिर्फ स्वाद या पसंद का मामला नहीं हो सकता। फीड में बदलाव और रुमेन की स्थिति भी भूख को प्रभावित कर सकती है।




