मंगलवार की सुबह थी, और रामू की सबसे अच्छी दुधारू गाय, लक्ष्मी, हमेशा की तरह चारे के पास नहीं आई। वह बाड़े के कोने में चुपचाप खड़ी रही, आँखें सुस्त, आधी बंद। जब रामू पास गए और उसका कान छुआ, तो वह हमेशा से ज़्यादा गर्म महसूस हुआ।
पहले तो उन्हें लगा शायद गर्मी की वजह से हो। पर फिर उन्हें चौधरी जी की "चोर वाली बात" याद आई। बिना एक पल गंवाए, वे दौड़कर चौधरी जी को बुला लाए।
चौधरी जी ने लक्ष्मी को दूर से ही देखा, फिर पास जाकर उसकी गर्दन, कान की जड़ और थन के पास हाथ फेरा। "भूख न लगना, सुस्ती, गर्मी - यही तो शुरुआत होती है," वे बोले। "गांठ अभी नहीं दिख रही, पर यह टालने वाली बात नहीं है।"
शुरुआती लक्षण आसानी से नज़र अंदाज़ हो जाते हैं
चौधरी जी ने समझाया कि एलएसडी अक्सर आम बीमारी जैसे दिखने वाले लक्षणों से शुरू होती है - अचानक बुखार, कम भूख, सुस्ती, कम हरकत। गांठ दिखने से पहले ही दूध की मात्रा घटने लगती है। "इसे मौसम पर या थकान पर टालना सबसे आसान है," उन्होंने कहा, "और यही वजह है कि किसान शुरुआती दो-तीन दिन गंवा देते हैं।"

आगे क्या होता है
अगर यह एलएसडी निकली, तो कुछ ही दिनों में शरीर पर सख्त, उभरी गांठें दिखेंगी - गर्दन, कंधे, पीठ, थन, पैर और सिर पर। पैरों में सूजन, आँखों से पानी बहना, नाक से स्राव, और त्वचा के नीचे सूजी गिल्टियाँ भी दिख सकती हैं। कुछ पशु चलने से कतराते हैं, देर तक एक ही जगह खड़े रहते हैं, या लंगड़ाते हैं। बीमारी बढ़ने पर कुछ गांठें खुले घाव भी बन सकती हैं, जिनमें ध्यान न देने पर बैक्टीरिया से दूसरा संक्रमण हो जाता है और रिकवरी में और देर लगती है।

"जितनी जल्दी पहचानोगे, उतनी जल्दी सही इलाज मिलेगा," चौधरी जी ने कहा। "गांठों का इंतज़ार करना मतलब इलाज के ज़रूरी शुरुआती दिन गंवाना।"
साझा सूत्र (आंतरिक नोट -छापने के लिए नहीं): चौधरी जी की सिखाई सतर्कता आखिर काम आती है - रामू इसे शुरुआत में ही पकड़ लेते हैं। भाग 5 उनके मन की चिंता से जेब की चिंता तक जाता है।
यह लेख जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से लिखा गया है, किसी भी उत्पाद के प्रचार के लिए नहीं। उपचार के लिए कृपया पंजीकृत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।






