डेयरी गाय के अधिकांश लैक्टेशन काल का समय गर्भावस्था के साथ ओवरलैप होता है। हर पशु चिकित्सक किसी गर्भवती पशु को एंटीबायोटिक, NSAID या हार्मोनल उपचार देने से पहले गर्भावस्था को ध्यान में रखता है। हम नियमित रूप से यह पूछते हैं कि कोई दवा गाय और उसके विकसित हो रहे भ्रूण के लिए सुरक्षित है या नहीं। लेकिन जब बात कैल्शियम लिक्विड, जेल जैसे फीड सप्लीमेंट्स की आती है, तो हम अक्सर अलग सवाल पूछते हैं।
- क्या यह दूध उत्पादन बढ़ाता है?
- क्या यह स्वादिष्ट है?
- क्या यह किफायती है?
हम शायद ही कभी एक उतना ही महत्वपूर्ण सवाल पूछते हैं: क्या यह सप्लीमेंट गर्भवती पशु के लिए उपयुक्त है?
इस सवाल पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि लैक्टेशन का अधिकांश समय उस दौरान होता है, जब पशु पहले से ही गर्भवती होती है।
वह बात जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता
गाय के ब्याने के बीच का सही अंतर बनाए रखने के लिए आमतौर पर ब्याने के 60–90 दिन बाद गाय का कृत्रिम गर्भाधान कराया जाता है। गर्भ ठहरने के बाद गाय की गर्भावस्था लगभग 280 दिनों तक रहती है, जबकि गाय का दूध देने का समय लगभग 305 दिनों का होता है।
इसका मतलब है कि दूध देने के लगभग 215–245 दिन ऐसे होते हैं, जब गाय गर्भवती भी होती है।
आसान शब्दों में, दूध देने के दौरान दिए जाने वाले लगभग तीन-चौथाई पोषण संबंधी सप्लीमेंट गर्भवती गायों को ही दिए जा रहे होते हैं।
इसलिए पोषण संबंधी सप्लीमेंट चुनते समय हमें यह भी ध्यान देना चाहिए कि वह गर्भवती गाय के लिए कितना उपयुक्त और सुरक्षित है।
गर्भावस्था एक नाजुक और संतुलित शारीरिक अवस्था है
डेयरी गाय में गर्भावस्था का सही तरीके से आगे बढ़ना शरीर में हार्मोन के सही संतुलन पर निर्भर करता है। प्रोजेस्टेरोन गर्भावस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह गर्भाशय को आराम की स्थिति में रखने, गर्भ को पोषण देने वाली झिल्ली के सही काम में मदद करने और भ्रूण के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में सहायक होता है।
पूरी गर्भावस्था के दौरान गाय का शरीर हार्मोन के स्तर को इस तरह नियंत्रित करता है कि गाय और उसके गर्भ में पल रहे बछड़े, दोनों को सही तरह से सहारा मिल सके। सफल गर्भावस्था के लिए शरीर में हार्मोन का यह प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है।
गर्भावस्था शरीर में होने वाले इस बारीकी से नियंत्रित हार्मोन संतुलन पर निर्भर करती है। इसलिए गर्भवती पशु के लिए पोषण संबंधी सप्लीमेंट चुनते समय सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि उसमें कौन-कौन से पोषक तत्व हैं, बल्कि यह भी ध्यान देना जरूरी है कि उसमें मौजूद हर सामग्री का शरीर पर क्या असर हो सकता है।
खास तौर पर उन सामग्री पर ध्यान देना चाहिए, जिनके बारे में यह बताया गया है कि उनमें हार्मोन जैसे, यानी एस्ट्रोजन जैसी गतिविधि हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान इस्तेमाल होने वाले सप्लीमेंट ऐसे होने चाहिए जो पशु की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करें, लेकिन बिना जरूरत उसके शरीर के प्राकृतिक हार्मोन संतुलन को प्रभावित न करें।
क्या सभी पोषण संबंधी सामग्री एक जैसा असर करती हैं?
जरूरी नहीं।
कई पोषण संबंधी सामग्री केवल खनिज, विटामिन या ऊर्जा प्रदान करती हैं और उनका शरीर के हार्मोन पर सीधा असर नहीं होता।
हालांकि, पशु चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाले कुछ कैल्शियम जेल और लिक्विड में मौजूद कुछ हर्बल सामग्री में फाइटोएस्ट्रोजन पाए जाने की बात सामने आई है। ये पौधों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ऐसे तत्व हैं, जो शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन जैसी गतिविधि कर सकते हैं।
पौधे के स्रोत, इन तत्वों की मात्रा और पशु के इनके संपर्क में आने के स्तर के आधार पर, ये शरीर में मौजूद एस्ट्रोजन के लिए जिम्मेदार हिस्सों के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं। इस कारण ये गर्भावस्था को बनाए रखने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि, इनका शरीर पर असर अलग-अलग हो सकता है, लेकिन इनकी मौजूदगी एक महत्वपूर्ण बात की ओर ध्यान दिलाती है: पोषण संबंधी सप्लीमेंट में शामिल सामग्री का केवल प्रभावी होना ही पर्याप्त नहीं है—गर्भावस्था के दौरान उनके इस्तेमाल की उपयुक्तता और सुरक्षा का भी सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
सिर्फ बताए गए फायदे से आगे भी सोचना जरूरी है
पशु चिकित्सक के रूप में अपनी पढ़ाई के दौरान हमें पशु के शरीर की कार्यप्रणाली, दवाओं का असर, बीमारियों, इलाज, सर्जरी, प्रजनन और अन्य विषयों के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाता है। लेकिन पशु चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाले सप्लीमेंट या दवाओं में मौजूद हर्बल सामग्री के शरीर पर होने वाले अलग-अलग प्रभावों के बारे में हमारी पढ़ाई में अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है।
इस वजह से हम अक्सर जड़ी-बूटियों को उनके बताए गए फायदों से जोड़कर देखते हैं - जैसे तनाव कम करना, भूख बढ़ाना या दूध उत्पादन को बेहतर बनाए रखने में मदद करना। लेकिन हमेशा यह ध्यान नहीं देते कि कुछ जड़ी-बूटियों का शरीर पर इसके अलावा भी असर हो सकता है। सिंथेटिक दवाओं की तरह ही, जड़ी-बूटियों में भी ऐसे सक्रिय तत्व होते हैं जो शरीर में असर पैदा कर सकते हैं। उनका असर हमेशा केवल उसी काम तक सीमित नहीं होता, जिसके लिए उन्हें किसी सप्लीमेंट में शामिल किया गया है।
गर्भवती पशुओं के लिए किसी उत्पाद की सलाह देते समय, हर सामग्री का शरीर पर होने वाला पूरा असर समझना उतना ही जरूरी है, जितना उसके बताए गए पोषण संबंधी फायदे को समझना।
पोषण की योजना में गर्भावस्था के दौरान सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए
गर्भावस्था के दौरान पोषण संबंधी सप्लीमेंट देने का उद्देश्य सीधा है—गाय की बढ़ी हुई पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करना और उसके शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली का ध्यान रखना।
चाहे उद्देश्य किसी समस्या से बचाव करना हो, ब्याने के आसपास के समय में गाय को सहारा देना हो, बीमारी या कमजोरी के बाद उसकी रिकवरी में मदद करना हो या दूध उत्पादन को बनाए रखना हो, पशु चिकित्सकों को ऐसे सप्लीमेंट चुनने चाहिए जो पूरी गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से इस्तेमाल करने के लिए उपयुक्त हों।
गर्भावस्था के लिए सही पोषण संबंधी सप्लीमेंट चुनना केवल किसी संभावित नुकसान से बचने की बात नहीं है—यह अच्छे पशु चिकित्सा अभ्यास और जिम्मेदार पशु प्रबंधन का भी हिस्सा है।
एक छोटा सवाल, लेकिन बड़े मायने
अगली बार जब आप दूध दे रही किसी गाय के लिए पोषण संबंधी सप्लीमेंट की सलाह दें, तो एक सवाल और जरूर पूछें:
"क्या यह गाय पहले से गर्भवती है?"
ज्यादातर मामलों में इसका जवाब हाँ होगा।
इसलिए एक और सवाल उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है:
"क्या मैं जिस सप्लीमेंट की सलाह दे रहा हूँ, वह पूरी गर्भावस्था के दौरान इस्तेमाल करने के लिए उपयुक्त है?"
जैसे-जैसे ब्याने के आसपास के समय में पोषण की हमारी समझ बेहतर हो रही है, वैसे-वैसे गर्भावस्था के दौरान सप्लीमेंट की सुरक्षा को पोषण संबंधी निर्णय लेते समय एक जरूरी हिस्सा माना जाना चाहिए—बाद में ध्यान देने वाली बात नहीं।




