शाम का समय था। रामू काका अपने बाड़े के बाहर बैठे थे और अपनी पसंदीदा क्रासब्रीड गाय गौरी को देख रहे थे। वह बार-बार अपनी पूंछ हिलाकर भिनभिनाते मच्छरों को भगा रही थी। अभी एक घंटे पहले ही पड़ोस के गाँव से श्यामू का फोन आया था। उसने चिंताजनक खबर दी: " रामू काका, हमारे गाँव के तीन फार्मों में लम्पी स्किन बीमारी फैल गई है! गायों को अचानक तेज़ बुखार आ रहा है और चमड़ी पर सख्त गांठें निकल आई हैं।"
रामू काका टकटकी लगाए गौरी को देखते रहे। श्यामू के गाँव से बीमारी उनके अपने बाड़े तक कैसे पहुँच सकती थी?
लम्पी स्किन बीमारी एक वायरस के कारण होती है। यह एक गंभीर बीमारी है, लेकिन यह कैसे फैलती है, इसे समझना ही अपने बाड़े को सुरक्षित रखने का पहला कदम है।
यह वायरस अपने आप चलकर किसी फार्म में नहीं आता। इसके लिए खून चूसने वाले कीड़े ज़िम्मेदार होते हैं। मच्छर, काटने वाली मक्खियाँ, अस्तबल की मक्खियाँ और चीचड़ (टिक) किसी संक्रमित गाय को काटते हैं, उसका वायरस अपने साथ ले जाते हैं और फिर किसी स्वस्थ पशु को काट लेते हैं। इन कीड़ों को उड़ती हुई सुइयाँ समझें जो बीमारी को एक फार्म से दूसरे फार्म तक ले जाती हैं।
सिर्फ़ कीड़े ही नहीं, और भी कारण हैं। यह वायरस साझा पानी की हौदी, गंदे चारे के बर्तन या एक से ज़्यादा पशुओं पर इस्तेमाल की गई बिना उबाली सुइयों से भी फैल सकता है। यहाँ तक कि बीमार पशु की आँखों, नाक या चमड़ी के घावों से निकलने वाला पानी भी वायरस फैलाता है। जब किसान बीमार पशुओं को ख़रीदते हैं या मवेशी बाज़ारों में ले जाते हैं, तो यह बीमारी रातों-रात पूरे ज़िले में फैल जाती है।
जब किसी गाय को लंपी होती है, तो उसके लक्षण तेज़ी से उभरते हैं। उसे तेज़ बुखार आता है, भूख लगनी बंद हो जाती है और वह जुगाली करना छोड़ देती है। उसका दूध उत्पादन तेज़ी से गिर जाता है। जल्द ही चमड़ी पर सख्त गांठें बनने लगती हैं, गले और पैरों की गिल्टियाँ (लिम्फ नोड्स) सूज जाती हैं और वज़न घटने लगता है।
हालाँकि लंपी में ज़्यादातर पशु बच जाते हैं, लेकिन असली नुक़सान किसान की जेब को होता है। बीमार गाय हफ़्तों तक दूध नहीं देती, कमज़ोर हो जाती है और उसकी देखभाल में लंबा समय लगता है।
ख़तरे को देखते हुए रामू काका समझ गए कि वे बीमारी के अपने दरवाज़े तक आने का इंतज़ार नहीं कर सकते। अगर आप आसपास लंपी की खबर सुनें, तो घबराएँ नहीं, बल्कि तुरंत कदम उठाएँ।
आज ही करें यह काम: आज ही अपने बाड़े का मुआयना करें। मच्छरों को रोकने के लिए आसपास जमा पानी निकालें, चारे की नांद की सफ़ाई करें और एक पशु की सुई या बर्तन दूसरे के साथ कभी साझा न करें। अगर कोई पशु सुस्त लगे, तो तुरंत अपने स्थानीय पशु चिकित्सक से सलाह लें।
अधिक जानकारी के लिए औंट्रा लैब्स से संपर्क करे!


